जर्मनी, बर्लिन की दीवार के 65 साल बाद. AfD के चुरपल्ला ने कहा, एकजुट रहें, बंटें नहीं. ब्रांडमाउर को ढहाएं
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बर्लिन, जर्मनी, एमएमएन संवाददाता. बर्लिन की दीवार बने 65 साल बाद जर्मनी में एक बार फिर दीवारों की बात हो रही है. इस बार यह दीवार कंक्रीट और कांटेदार तारों की नहीं है. इसे ब्रांडमाउर कहा जाता है. यह एक राजनीतिक दीवार है जो अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) को सत्तारूढ़ गठबंधनों से बाहर रखती है. 13 अगस्त की वर्षगांठ पर AfD के सह-नेता टीनो चुरपल्ला बर्लिन में खड़े हुए और एक सीधा अनुरोध किया, जिसके पीछे असली राजनीतिक ताकत है. उन्होंने कहा, एकजुट रहें, बंटें नहीं.
असली दीवार 1961 में बनाई गई थी. इसने परिवारों, दोस्तों और देश को बांट दिया. 1989 में इसके गिरने से जश्न मनाया गया और एक साल बाद देश फिर से एकजुट हुआ. पूर्वी जर्मनी के कई लोगों के लिए उस पल का पूरा वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है. आंकड़े कहानी का एक हिस्सा बताते हैं. जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च (DIW) के शोध से पता चलता है कि पूर्वी राज्यों में औसत आय पश्चिम की तुलना में करीब 15 प्रतिशत कम है. यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट और महामारी से उबरने की रफ्तार भी पूर्व में धीमी रही है.
चुरपल्ला ने इस वर्षगांठ का इस्तेमाल चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन की नीति को सीधे चुनौती देने के लिए किया. यह नीति AfD के साथ सहयोग करने से इनकार करती है. उनके मुताबिक, ब्रांडमाउर जर्मनी की एक पुरानी तस्वीर को सुरक्षित रखता है और पूर्वी नागरिकों की असली चिंताओं को अनदेखा करता है. उन्होंने AfD की हालिया चुनावी ताकत की ओर इशारा किया. 2024 के यूरोपीय संसद चुनावों में पार्टी ने 15.9 प्रतिशत वोट हासिल किए. 2025 के संघीय चुनाव में वह बुंडेस्टाग में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बन गई. पूर्व के कुछ हिस्सों में समर्थन 30 प्रतिशत से ऊपर चला जाता है.
इस समर्थन के पीछे क्या है. प्रवासन नीति से निराशा, आर्थिक ठहराव और यह भावना कि बर्लिन पूर्व की सुनता नहीं है. चुरपल्ला खासतौर पर अवैध सामूहिक प्रवासन के खिलाफ AfD के विरोध, लॉकडाउन की आलोचना और यूरोप में जारी युद्ध पर उसके रुख का जिक्र करते हैं, जिसमें यूक्रेन को सैन्य मदद भी शामिल है. ये रुख उस इलाके में गूंजते हैं जहां कई लोग कहते हैं कि उनकी आवाज को दबा दिया गया है. फ्रेडरिक एबर्ट फाउंडेशन के 2025 के सर्वेक्षण में पाया गया कि 58 प्रतिशत पूर्वी जर्मन मानते हैं कि उनके क्षेत्र के साथ देश के दूसरे दर्जे के हिस्से जैसा व्यवहार होता है. लगभग आधे लोगों ने कहा कि वे ऐसी पार्टी का समर्थन करेंगे जो मौजूदा व्यवस्था को चुनौती देती है.
चुरपल्ला के संदेश पर प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं है. आलोचक AfD की बयानबाजी को विभाजनकारी और लोकतांत्रिक मानदंडों से अलग बताते हैं. सैक्सोनी के सीडीयू मंत्री-अध्यक्ष माइकल क्रेश्मर ने ब्रांडमाउर नीति पर खुले तौर पर सवाल उठाया है. वह इसे अस्थिर बताते हैं और कहते हैं कि रूढ़िवादी पार्टियों को AfD मतदाताओं से जुड़ने के तरीके खोजने होंगे, बिना पार्टी के चरम तत्वों का समर्थन किए. उनकी टिप्पणी ने सीडीयू के अंदर एक व्यावहारिक बहस शुरू कर दी है. वहां क्षेत्रीय नेता सहयोग और अलगाव के बीच तौल रहे हैं.
चुनावी नक्शा दिखाता है कि यह क्यों मायने रखता है. 2025 के संघीय चुनाव में AfD ने पूर्वी राज्यों में 18.9 प्रतिशत वोट हासिल किए. पश्चिम में यह संख्या 12.6 प्रतिशत थी. 2024 में पार्टी थुरिंगिया में सबसे मजबूत ताकत बनी और 2025 में सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य संसद में उसे सबसे ज्यादा सीटें मिलीं. ये नतीजे सरकार में हिस्सेदारी में नहीं बदले, क्योंकि बाकी हर पार्टी AfD के साथ काम करने से इनकार करती है. कुछ विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह बहिष्कार अलगाव बढ़ा सकता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भरोसा घटा सकता है.
बर्लिन की दीवार की वर्षगांठ इस बात पर विचार करने का सही समय है कि लोगों को क्या अलग करता है और क्या जोड़ता है. चुरपल्ला AfD को 1989 की शांतिपूर्ण क्रांति का सच्चा रक्षक बताते हैं. वह कहते हैं कि पार्टी पहले पूर्व में और आखिरकार संघीय स्तर पर सरकार बनाना चाहती है. एकजुट करने की उनकी अपील नई नहीं है. इसके आसपास की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई हैं. जर्मन लोकतंत्र अब ऐसे दौर में है जहां पुरानी मान्यताएं टिकी नहीं हैं.
आगे क्या होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि जर्मनी इस तनाव को कैसे संभालता है. ब्रांडमाउर बना रह सकता है या बदल सकता है. बर्लिन की दीवार आखिरकार गिरी क्योंकि दोनों तरफ के लोगों ने तय किया कि अलगाव अब काम नहीं करेगा. क्या इसका राजनीतिक रूप भी वैसा ही करेगा. यह सवाल मतदाताओं, नेताओं और पूर्वी जर्मनी के उन लोगों से पूछा जाना चाहिए जो पूरी बराबरी के लिए तीन दशकों से इंतजार कर रहे हैं. जर्मनी के भविष्य पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है. पूर्व की आवाजें शायद इसमें निर्णायक भूमिका निभाएंगी.